क्यों मनाते हैं
जगन्नाथ रथ यात्रा पुरी में भगवान जगन्नाथ की विशाल रथ शोभायात्रा है, जिसमें देवताओं के रथ भक्ति से खींचे जाते हैं।
पुरी जगन्नाथ परंपरा
कब
रथ यात्रा आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया को पड़ती है (जून-जुलाई)।
कब से मनाया जाता है
पुरी की रथ यात्रा कई शताब्दियों से मनाई जाती है।
पुरी परंपरा
कौन मनाता है
पुरी, ओडिशा और दुनिया भर के जगन्नाथ भक्त इसे मनाते हैं।
उत्पत्ति
इसकी उत्पत्ति भगवान जगन्नाथ की अपने सहोदर बलभद्र और सुभद्रा के साथ गुंडिचा मंदिर की वार्षिक यात्रा से है, जो पुरी में मनाई जाती है।
पुरी जगन्नाथ परंपरा
पूजनीय देवता
भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा।
कैसे मनाएँ
देवताओं के विशाल लकड़ी के रथ खींचें, गाएँ-नाचें, और शोभायात्रा के साथ गुंडिचा मंदिर जाएँ।
विधि व प्रसाद
रथ खींचना, देवताओं का दर्शन, और वापसी यात्रा (बहुड़ा यात्रा)।