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त्योहार प्रोफ़ाइल

कार्तिक पूर्णिमा

कार्तिक पूर्णिमा — स्नान और दान का पावन दिन, भगवान शिव की विजय से जुड़ा है।

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कार्तिक पूर्णिमा, कार्तिक की पूर्णिमा, पवित्र स्नान, दान और भक्ति का दिन है, जो भगवान विष्णु और शिव को समर्पित है।

त्योहार की कथाएँ

त्रिपुरारी — त्रिपुरासुर का वध

कार्तिक पूर्णिमा पर भगवान शिव ने एक ही बाण से राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया, उसकी तीन उड़ती नगरियों से लोकों को मुक्त किया। इसलिए इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा कहा जाता है।
Skanda Purana (Tripura legend)

त्रिपुरारी — त्रिपुरासुर का वध

कार्तिक पूर्णिमा पर भगवान शिव ने एक ही बाण से राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया, उसकी तीन उड़ती नगरियों से लोकों को मुक्त किया। इसलिए इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा कहा जाता है।
Skanda Purana (Tripura legend)

क्यों मनाते हैं

कार्तिक पूर्णिमा, कार्तिक की पूर्णिमा, पवित्र स्नान, दान और भक्ति का दिन है, जो भगवान विष्णु और शिव को समर्पित है।
कार्तिक माह परंपरा

कब

कार्तिक पूर्णिमा हिंदू माह कार्तिक की पूर्णिमा को पड़ती है (अक्टूबर–नवंबर)।

कब से मनाया जाता है

कार्तिक माह की पवित्रता प्राचीन है, और कार्तिक पूर्णिमा स्नान सदियों से होता रहा है।
कार्तिक माह परंपरा

कौन मनाता है

पूरे भारत के हिंदु इसे मनाते हैं, पवित्र नदियों में विशेष स्नान के साथ।

उत्पत्ति

इसकी उत्पत्ति पवित्र कार्तिक माह से है, जो स्नान और भक्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है; पूर्णिमा इसका समापन है।
स्कंद पुराण; कार्तिक माह परंपरा

पूजनीय देवता

भगवान विष्णु और भगवान शिव; यह दिन शिव द्वारा राक्षस त्रिपुरासुर के वध (त्रिपुरारी पूर्णिमा) से जुड़ा है।

कैसे मनाएँ

प्रातः पवित्र स्नान करें, दीप व दान अर्पित करें, और विष्णु-शिव की पूजा करें।

विधि व प्रसाद

पवित्र स्नान, दीपदान, और विष्णु-शिव पूजा।

मुख्य तथ्य

कार्तिक पूर्णिमा वाराणसी में देव दीपावली के रूप में भी मनाई जाती है।
Regional tradition
कार्तिक पूर्णिमा वाराणसी में देव दीपावली के रूप में भी मनाई जाती है।
Regional tradition