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त्योहार प्रोफ़ाइल

करवा चौथ

विवाहित स्त्रियाँ पति की दीर्घायु के लिए व्रत रखती हैं और चाँद की पूजा करती हैं।

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करवा चौथ विवाहित स्त्रियों का त्योहार है, जिसमें वे पति की दीर्घायु और कल्याण के लिए सूर्योदय से चंद्रोदय तक व्रत रखती हैं।

त्योहार की कथाएँ

करवा की भक्ति

यह त्योहार करवा के नाम पर है, जिसकी भक्ति और व्रत ने उसके पति की रक्षा की। वीरावती की कथा भी व्रत की शक्ति दर्शाती है, जिसमें चंद्रमा के हस्तक्षेप ने उसके पति को बचाया।
North India regional tradition

करवा की भक्ति

यह त्योहार करवा के नाम पर है, जिसकी भक्ति और व्रत ने उसके पति की रक्षा की। वीरावती की कथा भी व्रत की शक्ति दर्शाती है, जिसमें चंद्रमा के हस्तक्षेप ने उसके पति को बचाया।
North India regional tradition

क्यों मनाते हैं

करवा चौथ विवाहित स्त्रियों का त्योहार है, जिसमें वे पति की दीर्घायु और कल्याण के लिए सूर्योदय से चंद्रोदय तक व्रत रखती हैं।
उत्तर भारत क्षेत्रीय परंपरा

कब

करवा चौथ कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को पड़ती है (अक्टूबर–नवंबर)।

कब से मनाया जाता है

करवा चौथ व्रत उत्तर भारत में कई शताब्दियों से मनाया जाता रहा है; यह आधुनिक दस्तावेजों से प्राचीन है।
क्षेत्रीय परंपरा

कौन मनाता है

विवाहित स्त्रियाँ, विशेषकर उत्तर और पश्चिमी भारत में।

उत्पत्ति

इसकी उत्पत्ति विवाहित स्त्रियों के पति हेतु व्रत की परंपरा से है, जो क्षेत्रीय रीति और भक्ति कथाओं से जुड़ी है।
क्षेत्रीय वैवाहिक परंपरा

पूजनीय देवता

भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा होती है; चंद्रोदय पर चंद्रमा का सम्मान।

कैसे मनाएँ

स्त्रियाँ भोर में उठकर सरगी खाती हैं, दिन भर व्रत रखती हैं, सायं पूजा करती हैं, और चाँद को छलनी से देखकर व पति को देखकर व्रत तोड़ती हैं।

विधि व प्रसाद

सरगी (प्रातः भोजन), व्रत, सायं शिव-पार्वती पूजा, और छलनी से चंद्रमा दर्शन।

मुख्य तथ्य

व्रत चंद्रमा देखने के बाद ही तोड़ा जाता है, जो दिन के तप का अंत है।
Regional tradition
व्रत चंद्रमा देखने के बाद ही तोड़ा जाता है, जो दिन के तप का अंत है।
Regional tradition