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Maha Navami

नवरात्रि का नौवाँ दिन — माँ दुर्गा के सबसे उग्र रूप की पूजा।

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महानवमी, नवरात्रि का नौवाँ दिन, माँ सिद्धिदात्री को समर्पित है और विजयदशमी से पहले देवी की विजय की पूजा का अंतिम दिन है।

त्योहार की कथाएँ

महानवमी नवरात्रि परंपरा का हिस्सा है, जो देवी माहात्म्य से जुड़ी है, जिसमें बंगाली अस्त्र और सरस्वती पूजा जैसे क्षेत्रीय रूप शामिल हैं।

नौवें दिन, देवी ने सिद्धिदात्री का रूप धारण किया, जो आध्यात्मिक शक्तियाँ प्रदान करती हैं, और अगले दिन महिषासुर पर अंतिम विजय प्राप्त करने लगीं।
Devi Mahatmya; regional Navaratri tradition

क्यों मनाते हैं

महानवमी, नवरात्रि का नौवाँ दिन, माँ सिद्धिदात्री को समर्पित है और विजयदशमी से पहले देवी की विजय की पूजा का अंतिम दिन है।
Devi Mahatmya; regional Navaratri tradition

कब

यह शारद नवरात्रि के दौरान आश्विन शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पड़ता है।

कौन मनाता है

पूरे भारत में दुर्गा के भक्त; बंगाल में इसी दिन दुर्गा पूजा की अंतिम पूजा होती है।

उत्पत्ति

महानवमी नवरात्रि परंपरा का हिस्सा है, जो देवी माहात्म्य से जुड़ी है, जिसमें बंगाली अस्त्र और सरस्वती पूजा जैसे क्षेत्रीय रूप शामिल हैं।
Devi Mahatmya; regional Navaratri tradition

पूजनीय देवता

माँ सिद्धिदात्री, नवदुर्गा का नौवाँ रूप।

कैसे मनाएँ

नवमी पूजा करें, भोग लगाएँ, और कई क्षेत्रों में अस्त्र-शस्त्र, औजार और देवी सरस्वती की पूजा करें। कुछ परंपराओं में हवन करें।

विधि व प्रसाद

नवमी भोग, हवन, नौ देवियों की पूजा, और अंतिम विजयदशमी विसर्जन की तैयारी।

मुख्य तथ्य

महानवमी बंगाल में प्रतिमा विसर्जन से पहले दुर्गा पूजा की अंतिम पूजा का दिन है। कुछ क्षेत्रों में इसे अष्टमी के साथ मनाया जाता है।
Devi Mahatmya; regional Navaratri tradition