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त्योहार प्रोफ़ाइल

मकर संक्रांति

फसल का त्योहार — सूर्य के उत्तरायण होने पर पतंग, तिल और मिठाई से मनाया जाता है।

सभी त्योहार

मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश व उत्तरायण होने का प्रतीक है। यह नई शुरुआत, पतंग और कृतज्ञता का फसल त्योहार है।

त्योहार की कथाएँ

भीष्म और उत्तरायण

द्वापर युग
महाभारत में भीष्म शरशय्या पर लेटे रहे और सूर्य के उत्तरायण, शुभ उत्तरी मार्ग में ही अपना देह त्यागना चुना, जो मोक्ष का शुभ समय माना जाता है।
Mahabharata (Bhishma Parva)

क्यों मनाते हैं

मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश व उत्तरायण होने का प्रतीक है। यह नई शुरुआत, पतंग और कृतज्ञता का फसल त्योहार है।
सौर कैलेंडर परंपरा; महाभारत

कब

यह सूर्य के मकर राशि में संक्रमण पर, प्रत्येक वर्ष लगभग 14 जनवरी को, निश्चित सौर तिथि पर पड़ता है।

कब से मनाया जाता है

उत्तरायण की पवित्रता प्राचीन है; महाभारत में भीष्म का निधन इसमें माना गया है। यह सौर पर्व द्वापर युग और पूर्व से मनाया जाता रहा है।
महाभारत (द्वापर युग); खगोलीय परंपरा

कौन मनाता है

पूरे भारत में अनेक नामों से: पोंगल (तमिलनाडु), उत्तरायण (गुजरात), लोहड़ी (पंजाब), बिहू (असम), माघी (पंजाब)।

उत्पत्ति

इसकी उत्पत्ति खगोलीय (सूर्य संक्रमण) और फसल धन्यवाद से जुड़ी है। महाभारत में उत्तरायण की पवित्रता का उल्लेख है।
महाभारत (उत्तरायण); सौर कैलेंडर परंपरा

पूजनीय देवता

सूर्य देव; कुछ क्षेत्रों में भगवान विष्णु या देवी लक्ष्मी (फसल समृद्धि)।
सौर परंपरा; क्षेत्रीय फसल पूजा

कैसे मनाएँ

स्नान करें, सूर्य को अर्घ्य दें, पतंग उड़ाएँ, तिल व गुड़ के व्यंजन बनाएँ और दान करें।
क्षेत्रीय स्मृति / पंचांग मार्गदर्शिकाएँ

विधि व प्रसाद

पतंग उड़ाना, तिल-गुड़, तिल व गर्म वस्त्र दान, और नदियों में पवित्र स्नान।
क्षेत्रीय स्मृति / पंचांग मार्गदर्शिकाएँ

मुख्य तथ्य

मकर संक्रांति सौर कैलेंडर से निश्चित कुछ हिंदू पर्वों में से एक है।
Solar-calendar tradition
गुजरात में इस दिन का पतंग उत्सव विश्व प्रसिद्ध है।
Regional tradition