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नवरात्रि

माँ दुर्गा की नौ रातें — भक्ति, नृत्य और व्रत के साथ मनाई जाती हैं।

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नवरात्रि का अर्थ है नौ रातें, जो माँ दुर्गा और उनके दिव्य रूपों को समर्पित हैं। यह बुराई पर अच्छाई की विजय और जगदम्बा की शक्ति का उत्सव है।

त्योहार की कथाएँ

इसकी उत्पत्ति देवी माहात्म्य (मार्कण्डेय पुराण का भाग) से जुड़ी है, जिसमें महिषासुर से युद्ध वर्णित है, और जगदम्बा की प्राचीन फसल व ऋतु पूजा से।

देवी माहात्म्य के अनुसार, देवी ने महिषासुर नामक राक्षस से नौ दिन और नौ रातें युद्ध किया, और दसवें दिन विजयदशमी पर उसे पराजित किया। नौ रातें दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती तीनों देवियों को समर्पित हैं।
Devi Mahatmya / Markandeya Purana

क्यों मनाते हैं

नवरात्रि का अर्थ है नौ रातें, जो माँ दुर्गा और उनके दिव्य रूपों को समर्पित हैं। यह बुराई पर अच्छाई की विजय और जगदम्बा की शक्ति का उत्सव है।
Devi Mahatmya / Markandeya Purana

कब

नवरात्रि वर्ष में दो बार मनाई जाती है — चैत्र (वसंत) और शारद (शरद, सितंबर–अक्टूबर)। शरद नवरात्रि सबसे प्रमुख है, जो आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से आरंभ होती है।

कौन मनाता है

नवरात्रि पूरे भारत और दुनिया भर के हिंदुओं द्वारा मनाई जाती है, जिसमें गुजरात में गरबा और डांडिया, बंगाल में दुर्गा पूजा, और दक्षिण भारत में नवरात्रि जैसी क्षेत्रीय परंपराएँ हैं।

उत्पत्ति

इसकी उत्पत्ति देवी माहात्म्य (मार्कण्डेय पुराण का भाग) से जुड़ी है, जिसमें महिषासुर से युद्ध वर्णित है, और जगदम्बा की प्राचीन फसल व ऋतु पूजा से।
Devi Mahatmya / Markandeya Purana

पूजनीय देवता

माँ दुर्गा और उनके नौ रूप (नवदुर्गा), देवी लक्ष्मी, और देवी सरस्वती।

कैसे मनाएँ

व्रत रखें, प्रतिदिन देवी की पूजा करें, दुर्गा सप्तशती का पाठ करें या मंत्र जपें, और कई क्षेत्रों में गरबा/डांडिया नृत्य करें।

विधि व प्रसाद

आरंभ में कलश स्थापना, प्रत्येक रात्रि को नौ रूपों की पूजा, आठवें/नौवें दिन कन्या पूजन, और दसवें दिन विसर्जन।

मुख्य तथ्य

नौ रातों में से प्रत्येक देवी के एक भिन्न रूप को समर्पित है। दसवाँ दिन विजयदशमी, दशहरे के रूप में भी मनाया जाता है।
Devi Mahatmya / Markandeya Purana