क्यों मनाते हैं
पोहेला बोइशाख बंगाली नव वर्ष है, आनंद, संगीत और पारंपरिक पंताभात (पानी में भिगोया चावल) का त्योहार।
बंगाली सौर कैलेंडर परंपरा
कब
पोहेला बोइशाख बंगाली माह बोइशाख के पहले दिन पड़ता है (मध्य अप्रैल)।
कब से मनाया जाता है
बंगाली कैलेंडर और उसका नव वर्ष 16वीं सदी का है; तभी से यह त्योहार मनाया जाता है।
बंगाली कैलेंडर परंपरा
कौन मनाता है
पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश और दुनिया भर के बंगाली इसे मनाते हैं।
उत्पत्ति
इसकी उत्पत्ति 16वीं सदी में सम्राट अकबर द्वारा प्रवर्तित बंगाली सौर कैलेंडर से है, जो फसल नव वर्ष का प्रतीक है।
बंगाली कैलेंडर (16वीं सदी)
पूजनीय देवता
नव वर्ष पूजा में देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा होती है; यह दिन व्यापार के देवता का सम्मान करता है।
कैसे मनाएँ
स्नान करें, नव वर्ष पूजा करें, मछली व सब्जियों के साथ पंताभात खाएँ, और सांस्कृतिक शोभायात्राओं में भाग लें।
विधि व प्रसाद
पंताभात भोजन, हल्दी के नव वर्ष अनुष्ठान, और मंगल शोभायात्रा।