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रक्षाबंधन

बहनें भाई की कलाई पर राखी बाँधती हैं — रक्षा के बंधन का उत्सव।

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रक्षाबंधन भाई और बहन के पवित्र बंधन का उत्सव है। बहन भाई की कलाई पर राखी (पवित्र धागा) बाँधती है, और भाई उसकी रक्षा का वचन देता है।

त्योहार की कथाएँ

इसकी उत्पत्ति महाभारत की द्रौपदी-कृष्ण कथा और श्रावण पूर्णिमा पर रक्षा धागा बाँधने की परंपराओं से जुड़ी है।

महाभारत में, जब युद्ध में कृष्ण घायल हुए, द्रौपदी ने अपनी साड़ी से एक पट्टी फाड़कर उनकी कलाई पर बाँध दी। उसकी सेवा से प्रभावित होकर कृष्ण ने उसकी रक्षा का वचन दिया और बाद में सभा में उसके अपमान के समय उसकी रक्षा की।
Mahabharata; regional Shravana Purnima tradition

क्यों मनाते हैं

रक्षाबंधन भाई और बहन के पवित्र बंधन का उत्सव है। बहन भाई की कलाई पर राखी (पवित्र धागा) बाँधती है, और भाई उसकी रक्षा का वचन देता है।
Mahabharata; regional Shravana Purnima tradition

कब

यह हिंदू माह श्रावण की पूर्णिमा को पड़ता है (अगस्त)।

कौन मनाता है

पूरे भारत और दुनिया भर के हिंदुओं द्वारा मनाया जाता है; यह भाई-बहन के प्रेम और रक्षा का सम्मान करता है और नारियल पूर्णिमा जैसे क्षेत्रीय त्योहारों से भी जुड़ा है।

उत्पत्ति

इसकी उत्पत्ति महाभारत की द्रौपदी-कृष्ण कथा और श्रावण पूर्णिमा पर रक्षा धागा बाँधने की परंपराओं से जुड़ी है।
Mahabharata; regional Shravana Purnima tradition

पूजनीय देवता

कुछ परंपराओं में भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा होती है; तटीय नारियल पूर्णिमा में यह वरुण देव को समर्पित है।

कैसे मनाएँ

बहन भाई के माथे पर तिलक लगाती है, राखी बाँधती है और उसकी दीर्घायु के लिए प्रार्थना करती है; भाई उपहार देता है और रक्षा का वचन देता है।

विधि व प्रसाद

राखी बाँधना, तिलक, आरती, मिठाई, और पारिवारिक मिलन।

मुख्य तथ्य

रक्षाबंधन कुछ क्षेत्रों में नारियल पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है, जो समुद्र देव वरुण को समर्पित है। यह पवित्र श्रावण पूर्णिमा को पड़ता है।
Mahabharata; regional Shravana Purnima tradition