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Sakat Chauth

स्त्रियाँ संतान की कल्याण हेतु व्रत रखती हैं — माँ सकट और चंद्रमा की पूजा।

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सकट चौथ संतान के कल्याण हेतु महिलाओं का व्रत है, जिसमें माँ सकट और चंद्रमा की पूजा होती है।

क्यों मनाते हैं

सकट चौथ संतान के कल्याण हेतु महिलाओं का व्रत है, जिसमें माँ सकट और चंद्रमा की पूजा होती है।
उत्तर भारत क्षेत्रीय परंपरा

कब

सकट चौथ माघ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को पड़ती है (जनवरी-फरवरी)।

कब से मनाया जाता है

सकट चौथ व्रत प्राचीन उत्तर भारतीय परंपरा है।
उत्तर भारत क्षेत्रीय परंपरा

कौन मनाता है

उत्तर भारत की माताएँ संतान के कल्याण हेतु इसे मनाती हैं।

उत्पत्ति

इसकी उत्पत्ति माताओं के संतान हेतु व्रत से है, जो देवी सकट का सम्मान करती हैं।
उत्तर भारत क्षेत्रीय परंपरा

पूजनीय देवता

देवी सकट और चंद्र देव।

कैसे मनाएँ

माताएँ व्रत रखती हैं, सकट पूजा करती हैं, और सायं चंद्रमा देखकर व्रत तोड़ती हैं।

विधि व प्रसाद

सकट पूजा, व्रत, और मिठाई व फल का भोग।

मुख्य तथ्य

सकट चौथ को कृष्ण परंपरा में संकष्टी चतुर्थी भी कहते हैं।
Regional tradition