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शरद पूर्णिमा

शरद पूर्णिमा — माँ लक्ष्मी को समर्पित, चाँदनी में खीर के साथ मनाई जाती है।

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शरद पूर्णिमा, शरद ऋतु की पूर्णिमा, देवी लक्ष्मी को समर्पित है और चाँदनी में खीर रखकर मनाई जाती है।

त्योहार की कथाएँ

चाँदनी का अमृत

परंपरा के अनुसार शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की किरणें अमृत से युक्त होती हैं। चाँदनी में खीर रखना उसे पवित्र करने वाला माना जाता है, और देवी लक्ष्मी को प्रसन्न कर समृद्धि लाता है।
Regional tradition

चाँदनी का अमृत

परंपरा के अनुसार शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की किरणें अमृत से युक्त होती हैं। चाँदनी में खीर रखना उसे पवित्र करने वाला माना जाता है, और देवी लक्ष्मी को प्रसन्न कर समृद्धि लाता है।
Regional tradition

क्यों मनाते हैं

शरद पूर्णिमा, शरद ऋतु की पूर्णिमा, देवी लक्ष्मी को समर्पित है और चाँदनी में खीर रखकर मनाई जाती है।
क्षेत्रीय परंपरा

कब

शरद पूर्णिमा हिंदू माह आश्विन की पूर्णिमा को पड़ती है (सितंबर–अक्टूबर)।

कब से मनाया जाता है

शरद पूर्णिमा अनुष्ठान प्राचीन है, फसल ऋतु से जुड़ा।
क्षेत्रीय परंपरा

कौन मनाता है

पूरे भारत के हिंदु इसे मनाते हैं, विशेषकर गुजरात और महाराष्ट्र में।

उत्पत्ति

इसकी उत्पत्ति शरद पूर्णिमा पर देवी लक्ष्मी की पूजा और चाँदनी में अमृत के विश्वास से जुड़ी है।
क्षेत्रीय परंपरा; लक्ष्मी पूजा

पूजनीय देवता

देवी लक्ष्मी।

कैसे मनाएँ

खीर का प्याला रात भर चाँदनी में रखें, और अगली सुबह उसे प्रसाद के रूप में खाएँ।

विधि व प्रसाद

चाँदनी में खीर, लक्ष्मी पूजा, और रात्रि भक्ति।

मुख्य तथ्य

कुछ क्षेत्रों में शरद पूर्णिमा कृष्ण और गोपियों की रास लीला से जुड़ी है।
Krishna tradition
कुछ क्षेत्रों में शरद पूर्णिमा कृष्ण और गोपियों की रास लीला से जुड़ी है।
Krishna tradition