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Skanda Sashti

भगवान मुरुगन (कार्तिकेय) को समर्पित छठा दिन — बुराई पर उनकी विजय का उत्सव।

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स्कंद षष्ठी भगवान मुरुगन (कार्तिकेय) को समर्पित दिन है, जो राक्षस सूरपद्मन पर उनकी विजय का उत्सव है।

त्योहार की कथाएँ

सूरपद्मन पर विजय

राक्षस सूरपद्मन ने स्वर्ग और पृथ्वी को आतंकित किया। बुराई के विनाश हेतु जन्मे भगवान मुरुगन ने स्कंद षष्ठी पर उसे युद्ध में पराजित किया, धर्म की स्थापना की। सूरसंहार त्योहार इसी की स्मृति है।
Skanda Purana

क्यों मनाते हैं

स्कंद षष्ठी भगवान मुरुगन (कार्तिकेय) को समर्पित दिन है, जो राक्षस सूरपद्मन पर उनकी विजय का उत्सव है।
स्कंद पुराण; तमिल परंपरा

कब

स्कंद षष्ठी कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को पड़ती है (अक्टूबर-नवंबर), और तमिल माह ऐप्पसी में।

कब से मनाया जाता है

मुरुगन पूजा दक्षिण भारत में प्राचीन है, स्कंद पुराण से जुड़ी।
तमिल परंपरा

कौन मनाता है

भगवान मुरुगन के भक्त, विशेषकर तमिलनाडु में इसे मनाते हैं।

उत्पत्ति

इसकी उत्पत्ति स्कंद पुराण में वर्णित राक्षस सूरपद्मन पर भगवान मुरुगन की विजय से है।
स्कंद पुराण

पूजनीय देवता

भगवान मुरुगन (कार्तिकेय) और उनकी पत्नियाँ वल्ली व देवयानी।

कैसे मनाएँ

मुरुगन मंदिर जाएँ, अभिषेक व पूजा करें, और भव्य सूरसंहार में राक्षस के वध का पुनरावर्तन करें।

विधि व प्रसाद

अभिषेक, पूजा, और मुरुगन की विजय का सूरसंहार उत्सव।

मुख्य तथ्य

तिरुचेंदूर में सूरसंहार महान भक्ति के साथ आयोजित होता है।
Tamil tradition