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त्योहार प्रोफ़ाइल

उगादि

तेलुगु और कन्नड़ नव वर्ष — बेवु-बेला के विशेष व्यंजन और नई शुरुआत के साथ मनाया जाता है।

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उगादि तेलुगु और कन्नड़ नव वर्ष है, नई शुरुआत और आनंद का त्योहार, जिसमें कड़वे नीम और मीठे गुड़ का विशेष व्यंजन (बेवु-बेला) बनता है।

त्योहार की कथाएँ

नव वर्ष पंचांग

उगादि पर परिवार पंचांग पढ़कर नया वर्ष आरंभ करते हैं, जो आने वाले वर्ष की भविष्यवाणी करता है, और जीवन के कड़वे-मीठे को समभाव से स्वीकारने के लिए बेवु-बेला चखते हैं।
South Indian regional tradition

क्यों मनाते हैं

उगादि तेलुगु और कन्नड़ नव वर्ष है, नई शुरुआत और आनंद का त्योहार, जिसमें कड़वे नीम और मीठे गुड़ का विशेष व्यंजन (बेवु-बेला) बनता है।
दक्षिण भारतीय चंद्र-सौर परंपरा

कब

उगादि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को पड़ती है (मार्च-अप्रैल), हिंदू चंद्र-सौर कैलेंडर का पहला माह।

कब से मनाया जाता है

उगादि दक्षिण भारत में सदियों से नव वर्ष के रूप में मनाई जाती रही है, चंद्र-सौर कैलेंडर से जुड़ी।
दक्षिण क्षेत्रीय परंपरा

कौन मनाता है

दक्षिण भारत और दुनिया भर के तेलुगु व कन्नड़ समुदाय इसे मनाते हैं।

उत्पत्ति

इसकी उत्पत्ति नए चंद्र-सौर वर्ष के आरंभ से है, जो इसी दिन ब्रह्मा द्वारा सृष्टि की रचना और वसंत के आगमन से जुड़ा है।
क्षेत्रीय परंपरा; चंद्र-सौर नव वर्ष

पूजनीय देवता

भगवान ब्रह्मा, और नव वर्ष अनुष्ठानों में भगवान गणेश व नवग्रहों का सम्मान।

कैसे मनाएँ

तेल स्नान करें, नव वर्ष पूजा करें, नया पंचांग पढ़ें, और जीवन के मीठे-कड़वे के प्रतीक बेवु-बेला (नीम और गुड़) खाएँ।

विधि व प्रसाद

पंचांग पठन, बेवु-बेला, तेल स्नान, और आम के पत्तों से घर की सजावट।

मुख्य तथ्य

उगादि महाराष्ट्र में उसी दिन गुड़ी पड़वा के रूप में मनाई जाती है।
Regional tradition