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त्योहार प्रोफ़ाइल

Vat Savitri

विवाहित स्त्रियाँ पवित्र बरगद के नीचे पति के लिए व्रत रखती हैं — सावित्री की याद में।

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वट सावित्री वह दिन है जब विवाहित स्त्रियाँ पवित्र वट वृक्ष के नीचे पति के लिए प्रार्थना करती हैं, सावित्री की भक्ति का सम्मान करते हुए।

त्योहार की कथाएँ

सावित्री और सत्यवान

द्वापर युग
जब यमराज अपने पति सत्यवान को लेने आए, सावित्री ने उनका पीछा किया और अपनी बुद्धि व भक्ति से पति को वापस जीत लिया। उनकी कथा पत्नी की भक्ति का प्रतीक है।
Mahabharata (Vanaparva)

क्यों मनाते हैं

वट सावित्री वह दिन है जब विवाहित स्त्रियाँ पवित्र वट वृक्ष के नीचे पति के लिए प्रार्थना करती हैं, सावित्री की भक्ति का सम्मान करते हुए।
महाभारत (वन पर्व); सावित्री कथा

कब

वट सावित्री ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की अमावस्या को पड़ती है (मई-जून), कुछ क्षेत्रों में पूर्णिमा को।

कब से मनाया जाता है

सावित्री कथा महाभारत (वन पर्व) की है, और वट सावित्री व्रत सदियों से मनाया जाता है।
महाभारत परंपरा

कौन मनाता है

उत्तर भारत, महाराष्ट्र और नेपाल की विवाहित स्त्रियाँ इसे मनाती हैं।

उत्पत्ति

इसकी उत्पत्ति सावित्री की कथा से है, जिन्होंने अपनी भक्ति और बुद्धि से पति सत्यवान को मृत्यु से वापस लाया।
महाभारत (सावित्री-सत्यवान)

पूजनीय देवता

भगवान सावित्र (सूर्य) और भक्त सावित्री का सम्मान।

कैसे मनाएँ

विवाहित स्त्रियाँ व्रत रखती हैं, वट वृक्ष की परिक्रमा करती हैं, उसके चारों ओर धागा बाँधती हैं, और पति की दीर्घायु की प्रार्थना करती हैं।

विधि व प्रसाद

व्रत, वट वृक्ष परिक्रमा, धागा बाँधना, और पति के प्रतीक के रूप में वृक्ष की पूजा।

मुख्य तथ्य

वट वृक्ष पवित्र माना जाता है क्योंकि यह पति की दीर्घायु का प्रतीक है।
Regional tradition