अपवर्ग-धर्म का उद्देश्य नहीं
'धर्मस्य ह्यापवर्ग्यस्य नार्थोऽर्थायोपकल्पते' (भा. १.२.९)।
Artha
अर्थ — पुरुषार्थ-चतुष्टय (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) में तृतीय है: भौतिक समृद्धि, सम्पत्ति और राजनीतिक-आर्थिक उन्नति का व्यवस्थित अर्थ; राजनीति-शास्त्र (अर्थशास्त्र) परम्परा इसी से जुड़ी है। संसाधित पदों में: जिस धर्म का लक्ष्य अपवर्ग है उसमें अर्थ ही साध्य नहीं — 'नार्थोऽर्थायोपकल्पते' (भा. १.२.९)।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.2.9 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=110173)
'धर्मस्य ह्यापवर्ग्यस्य नार्थोऽर्थायोपकल्पते' (भा. १.२.९)।