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बदरि

Badari

अन्य नाम बदर्याश्रम · Badarikashrama

बदर्याश्रम — वह तपोस्थल जहाँ देव नारायण और भगवान् ऋषि नर, लोकों का भावन करने वाले दोनों, दीर्घ और तीव्र किन्तु मृदु तप करते रहे: 'यत्र नारायणो देवो नरश्च भगवान् ऋषिः । मृदु तीव्रं तपो दीर्घं तेपाते लोकभावनौ' (भा. ३.४.२२)। तीसरे स्कन्ध में यही स्थान उद्धव का गंतव्य है: अपने कुल के संहार से पूर्व भगवान् ने उनसे कहा — 'बदरीं त्वं प्रयाहि' (भा. ३.४.४), और वियोग-आतुर उद्धव ने उसे अपना 'दयित' कहकर वहाँ जाने का संकल्प बताया (भा. ३.४.२१)। त्रिलोक-गुरु शब्द-योनि भगवान् द्वारा सन्दिष्ट होकर वे वहाँ पहुँचे और समाधि से हरि की आराधना करने लगे (भा. ३.४.३२)। भागवत इसे 'बदरि' और 'बदर्याश्रममण्डल' दोनों नामों से पुकारता है।

श्रीमद्भागवतमहापुराण 3.4.4 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर अध्याय-पृष्ठ; देवनागरी पाठ सत्यापित प्रतिलिपि से — validation/sanskrit_skandha3.json)