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भक्ति

Bhakti

अन्य नाम भक्तियोग · भगवच्छिक्षया · Bhakti-yoga

भक्ति — परमेश्वर में प्रेम-समर्पण: भागवत के अनुसार समस्त धर्मों का शिखर। भा. १.५ में: स्वधर्म त्यागकर भजन में अपक्व गिरने वाले का भी अभद्र नहीं (१.५.१७); मुकुंद-सेवा का आस्वाद अपूर्वतम (१.५.१९); समस्त तप-श्रुति-यज्ञ का अविच्युत अर्थ उत्तमश्लोक-गुणानुवर्णन (१.५.२२); तापत्रय की चिकित्सा ईश्वरे कर्म (१.५.३२)।

श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.2.6 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=110173)