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भीष्म

Bhishma

अन्य नाम देवव्रतः · भरतपुङ्गवः · वसूत्तमः

भीष्म (देवव्रत, गाङ्गेय) — शान्तनु और गङ्गा के पुत्र, कुरु-वंश के पितामह; पिता के विवाह के लिए आजीवन ब्रह्मचर्य और राज्य-त्याग की भीषण प्रतिज्ञा से 'भीष्म' कहलाए, और इसी से इच्छा-मृत्यु का वरदान पाया। परम्परा में वे अष्टम वसु के अवतार माने जाते हैं — भा. १.९.९ में 'वसूत्तम' कहा गया है। महाभारत-युद्ध में कौरव-पक्ष के सेनापति रहे; अर्जुन के बाणों से बिंधकर शर-शय्या पर उत्तरायण की प्रतीक्षा करते रहे (भा. १.९.२९)। भा. १.९ में उन्होंने युधिष्ठिर को दान, राज, मोक्ष, स्त्री और भगवद्-धर्म का सम्पूर्ण उपदेश दिया, फिर 'भीष्म-स्तुति' (भा. १.९.३२–४२) कहकर निष्कल ब्रह्म में लीन हो गए। उनकी स्तुति की विशेषता यह है कि वे उसी कृष्ण का स्मरण करते हैं जिन्हें उन्होंने अपने ही बाणों से बींधा था।

श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.9.1 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=330834)