स्थान
ब्रह्मावर्त
Brahmavarta
ब्रह्मावर्त — सरस्वती और दृषद्वती नदियों के मध्य स्थित पवित्र भूभाग, जिसे मनुस्मृति 'देवनिर्मित देश' कहकर वर्णाश्रम-आचार का आदर्श क्षेत्र बताती है; कुरुक्षेत्र इसी के निकट है। भा. १.१७.३३ में परीक्षित कलि को आदेश देते हैं कि वह वहाँ न रहे 'जहाँ धर्म और सत्य से आचरण होता है — उस ब्रह्मावर्त में, जहाँ यज्ञ-विस्तार के ज्ञाता यज्ञों से यज्ञेश्वर की आराधना करते हैं'; और अगली ऋचा में उस आराधना का फल बताया गया है कि वहाँ स्वयं हरि यजमानों का कल्याण करते हैं।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.17.33 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=313090)