'अत्रेरपत्यमभिकाङ्क्षत आह तुष्टो दत्तो मयाहमिति यद्भगवान् स दत्तः' (भा. २.७.४); उनके चरण-रज से यदु और हैहय आदि ने उभयविध योग-सम्पत्ति पाई।
दत्तात्रेय
Dattatreya
दत्तात्रेय — वैष्णव परम्परा के प्रसिद्ध योगी-देवता: अत्रि-अनसूया के पुत्र, विष्णु के अंशावतार, जिन्हें 'दत्त' (दान किया हुआ पुत्र) कहा गया; अवधूत-परम्परा के आदि-गुरु और त्रिमूर्ति-स्वरूप की उपासना के केन्द्र। भा. १.३.११: भगवान् अत्रि के पुत्र रूप में अनसूया द्वारा प्राप्त हुए और इन्होंने अलर्क तथा प्रह्लादादि को आन्वीक्षिकी का उपदेश दिया (नाम 'दत्तात्रेय' पाठ में नहीं — सर्वमान्य परम्परा)।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.3.11 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=369178)
दत्तात्रेय का अत्रि के साथ सम्बन्ध: पुत्र। स्रोत प्रमाण (SB 1.3.11): वे अत्रि के पुत्र रूप में प्राप्त हुए: 'अत्रेरपत्यत्वम्' (भा. १.३.११)। प्रमाण: प्रत्यक्ष।
पुत्र Anasuya Humanदत्तात्रेय का अनसूया के साथ सम्बन्ध: पुत्र। स्रोत प्रमाण (SB 1.3.11): अनसूया ने उन्हें पुत्र रूप में पाया: 'वृतः प्राप्तोऽनसूयया' (भा. १.३.११)। प्रमाण: प्रत्यक्ष।
गुरु Alarka राजादत्तात्रेय का अलर्क के साथ सम्बन्ध: शिक्षक। स्रोत प्रमाण (SB 1.3.11): उन्होंने अलर्क को आन्वीक्षिकी का उपदेश दिया: 'आन्वीक्षिकीमलर्काय' (भा. १.३.११)। प्रमाण: प्रत्यक्ष।
गुरु Prahlada Asuraदत्तात्रेय का प्रह्लाद के साथ सम्बन्ध: शिक्षक। स्रोत प्रमाण (SB 1.3.11): उन्होंने 'प्रह्लादादि' को उपदेश दिया: 'प्रह्लादादिभ्य ऊचिवान्' (भा. १.३.११)। प्रमाण: प्रत्यक्ष।
षष्ठ अवतार: भगवान् अत्रि-पुत्र रूप में अनसूया द्वारा प्राप्त हुए: 'षष्ठेऽत्रेरपत्यत्वं वृतः प्राप्तोऽनसूयया' (भा. १.३.११); 'दत्तात्रेय' इस अवतार का सर्वमान्य नाम। प्रमाण: धारणा प्रत्यक्ष; नाम प्रबल साक्ष्य।
उनका उपदिष्ट शास्त्र आन्वीक्षिकी (तात्त्विक अनुशीलन) था: 'आन्वीक्षिकीम्... ऊचिवान्' (भा. १.३.११)। प्रमाण: प्रत्यक्ष।