दुर्वासा
Durvasa
दुर्वासा — अत्रि और अनसूया के पुत्र, शिव के अंश माने जाने वाले ऋषि; उग्र तपस्या और अत्यन्त कोप के लिए विख्यात, किन्तु प्रसन्न होने पर महान् वरदाता भी। कुन्ती को दिया गया मन्त्र-वरदान, अम्बरीष का प्रसङ्ग और शकुन्तला को दिया शाप उन्हीं से जुड़े आख्यान हैं। वनवास के समय दुर्योधन ने उन्हें दस सहस्र शिष्यों सहित पाण्डवों के पास भेजा जिससे वे भोजन न दे पाने पर शापित हों; किन्तु कृष्ण ने द्रौपदी के अक्षय-पात्र में लगा शाक का एक कण खाकर तीनों लोकों को तृप्त कर दिया — भा. १.१५.११ में अर्जुन इसी सङ्कट-मोचन का स्मरण करते हैं। अत्रि पहले से ही इस कोश में एक इकाई है।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.15.11 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=364156)