गजेन्द्र
Gajendra
गजेन्द्र वह यूथपति हाथी है जिसकी कथा भागवत के अष्टम स्कन्ध में 'गजेन्द्र-मोक्ष' के नाम से प्रसिद्ध है। सरोवर में जल पीते समय ग्राह ने उसका पाँव पकड़ लिया और सहस्रों वर्षों के संघर्ष के बाद, अपना बल क्षीण होने पर, उसने सूँड़ में कमल लेकर आदिपुरुष की स्तुति की; भगवान् गरुड़ पर आरूढ़ होकर आए और चक्र से ग्राह का वध कर उसका उद्धार किया। भा. २.७.१५–१६ में यह कथा दो श्लोकों में आती है, और १५वें श्लोक में गजेन्द्र की पुकार के शब्द — 'तीर्थश्रवः श्रवणमङ्गलनामधेय' — उद्धृत हैं, जो शरणागति के आदर्श वचन माने जाते हैं।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 2.7.15 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=200170)