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गरुड

Garuda

अपने कंधे पर भगवान् को धारण करना

भा. ३.२.२४ में असुरों ने युद्ध में भगवान् को तार्क्ष्य-पुत्र (गरुड़) के कंधे पर, सुनाभ चक्र धारण किये, वेग से आते देखा: 'तार्क्ष्यपुत्रमंसे सुनाभायुधमापतन्तम्' — यहाँ संधि-विच्छेद 'तार्क्ष्य-पुत्रम् + अंसे' है, 'पुत्र मंसे' नहीं।

गरुड — carries — श्रीकृष्ण

हरि गरुड़ की भुजा पर आरूढ़ होकर गजेन्द्र की रक्षा के लिए आए: 'चक्रायुधः पतगराजभुजाधिरूढः' (भा. २.७.१६)। दिशा: वाहन → आरूढ़। प्रमाण: प्रत्यक्ष।