हनुमान्
Hanuman
हनुमान् वायु-पुत्र, अञ्जना के गर्भ से उत्पन्न वानर-वीर और रामायण के केन्द्रीय पात्रों में हैं; उन्होंने समुद्र लाँघकर लङ्का में सीता का पता लगाया, सञ्जीवनी लाकर लक्ष्मण के प्राण बचाए और युद्ध में राम की सेवा की। वे चिरञ्जीवी माने जाते हैं और जहाँ भी राम-कथा होती है वहाँ उपस्थित रहते हैं — इसीलिए भक्ति-परम्परा में वे दास्य-भाव के परम आदर्श हैं। भा. २.७.४५ में उन्हें उन विशिष्ट जनों की सूची में गिना गया है जो भगवान् की योगमाया को जानते हैं और उसे पार करते हैं — विभीषण, उपेन्द्रदत्त, पार्थ, आर्ष्टिषेण, विदुर और श्रुतदेव के साथ।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 2.7.45 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=200170)