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इन्द्र

Indra

मानभंग से क्रोध में व्रज पर वर्षा

मानभंग होने पर इंद्र ने क्रोध से वर्षा की और व्रज अत्यन्त व्याकुल हो गया; तब भगवान् ने गोत्र को लीला-तपत्र बनाकर उसकी रक्षा की: 'वर्षतीन्द्रे व्रजः कोपाद्भग्नमानेऽतिविह्वलः' (भा. ३.२.३३)।