जनमेजय
Janamejaya
जनमेजय — परीक्षित और इरावती के ज्येष्ठ पुत्र, कुरु-वंश के सम्राट्; भा. १.१६.२ में चार पुत्रों में प्रथम रूप में नामित। पिता की तक्षक द्वारा मृत्यु का प्रतिकार करने के लिए उन्होंने प्रसिद्ध सर्प-सत्र किया, जिसे आस्तीक ऋषि की प्रार्थना पर रोका गया। इसी सर्प-सत्र के अवसर पर वैशम्पायन ने उन्हें महाभारत सुनाया — इस प्रकार महाभारत और भागवत दोनों की कथा-परम्परा इसी वंश-शृङ्खला से जुड़ी है। वैशम्पायन इस कोश में पहले से एक इकाई हैं।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.16.2 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=148532)
जनमेजय का महाराज परीक्षित के साथ सम्बन्ध: पुत्र। स्रोत प्रमाण (SB 1.16.2): जनमेजय परीक्षित का पुत्र है: 'जनमेजयादींश्चतुरस्तस्यामुत्पादयत्सुतान्' (भा. १.१६.२) — इरावती से चार पुत्रों में प्रथम। दिशा: पुत्र → पिता। प्रमाण: प्रत्यक्ष।
पुत्र Iravati Humanजनमेजय का इरावती के साथ सम्बन्ध: पुत्र। स्रोत प्रमाण (SB 1.16.2): जनमेजय इरावती का पुत्र है: 'तस्याम्' (भा. १.१६.२) — उसी इरावती से चार पुत्र उत्पन्न हुए। दिशा: पुत्र → माता। प्रमाण: प्रत्यक्ष।