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जीव

Jiva (the living being)

सार्थक धर्म: तत्त्वजिज्ञासा

'जीवस्य तत्त्वजिज्ञासा' (भा. १.२.१०)।

'स जीवो यत्पुनर्भवः' — पाठगत; भाष्य-मतभेद

भा. १.३.३२ गुण-व्यापार-रहित अव्यक्त परम को 'स जीवो यत्पुनर्भवः' कहता है; भाष्यकारों के मत भिन्न (जीव बनाम मूलाव्यक्त) — पाठ यथावत्।