कृष्ण बलदेव के साथ मथुरा आये और अपने माता-पिता का कल्याण करने की इच्छा से कंस को उसके उच्च आसन से गिराकर मार डाला, और उसके प्राण निकल जाने पर उसे बलपूर्वक भूमि पर घसीटा: 'निपात्य तुङ्गाद्रिपुयूथनाथं हतं व्यकर्षद्व्यसुमोजसोर्व्याम्' — संधि-विच्छेद 'तुङ्गात् + रिपुयूथनाथम्' है (भा. ३.३.१)।
राजा
कंस
Kamsa
कंस — मथुरा का अत्याचारी राजा, उग्रसेन का पुत्र और देवकी का भाई। आकाशवाणी से यह जानकर कि देवकी का आठवाँ गर्भ उसका वध करेगा, उसने देवकी और वसुदेव को कारागार में डाल दिया और उनकी सन्तानों का वध किया। अन्ततः कृष्ण के हाथों मारा गया। भा. १.८.२३ में कुन्ती उसका स्मरण करती हैं — 'खलेन देवकी कंसेन रुद्धातिचिरं शुचार्पिता' — और अपनी रक्षा की तुलना देवकी की मुक्ति से करती हैं।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.8.23 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=196197)
उच्च आसन से गिराकर वध और भूमि पर घसीटा जाना