कर्ण
Karna
कर्ण (राधेय, वसुषेण) — कुन्ती का सूर्य से उत्पन्न ज्येष्ठ पुत्र, कुमारी अवस्था में जन्म लेने के कारण जल में प्रवाहित किए गए और सूत अधिरथ तथा राधा द्वारा पाले गए; अतः पाण्डवों के ज्येष्ठ भ्राता होते हुए भी 'सूतपुत्र' कहलाए। कवच-कुण्डल के साथ जन्मे, परशुराम से अस्त्र-विद्या सीखी, दुर्योधन के परम मित्र और अङ्ग-देश के राजा बने। दान-शीलता के लिए 'दानवीर' कहलाते हैं — इन्द्र को कवच-कुण्डल तक दे दिए। महाभारत-युद्ध में सेनापति बने और अर्जुन के हाथों मारे गए। भा. १.१५.१५–१६ में अर्जुन उनकी सेना और अस्त्रों का स्मरण करते हुए स्वीकार करते हैं कि कृष्ण के प्रभाव से ही वे बच सके।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.15.15 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=364156)