'चकार दुश्चरं ब्रह्म ब्रह्मचर्यमखण्डितम्' (भा. १.३.६; विकिस्रोत पाठ 'चचार')।
कुमार
Kumaras (the four celibate boy-sages)
अन्य नाम कौमारं सर्गम् · Kaumara-sarga (the Kumara creation)
चार कुमार — सनक, सनातन, सनन्दन और सनातनकुमार: ब्रह्मा के मानस-पुत्र, जो बाल-ब्रह्मचारी रहकर ज्ञान-भक्ति-मार्ग के आदि आचार्य माने गए; हिन्दू परम्परा में निष्काम ज्ञान-मार्ग के प्रतीक। भा. १.३.६ में भगवान् का प्रथम धारित रूप 'कौमारं सर्गम्' — कुमार-सृष्टि — कहा गया जिसने अखण्ड दुश्चर ब्रह्मचर्य का पालन किया; चार कुमारों से तादात्म्य सर्वसम्मत परम्परा है।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.3.6 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=369178)
भगवान् ने 'प्रथम देव' रूप में कौमार सर्ग धारण किया: 'स एव प्रथमं देवः कौमारं सर्गमाश्रितः' (भा. १.३.६); कौमार सर्ग = चार बाल-ब्रह्मचारी कुमार — सर्वसम्मत परम्परा। प्रमाण: धारणा प्रत्यक्ष; तादात्म्य प्रबल साक्ष्य।