भा. ३.९.२३ में ब्रह्मा भगवान् को 'प्रपन्नवरद' कहते हैं, जो 'रमयाऽऽत्मशक्त्या' — रमा रूप अपनी शक्ति से — जो-जो करेंगे, गुण-अवतार को ग्रहण कर। रमा लक्ष्मी का ही नाम है, जो रोस्टर में 'लक्ष्मी' के रूप में पहले से हैं।
लक्ष्मी
Lakshmi
अन्य नाम रमा · Rama (Ramā)
लक्ष्मी (श्री) — विष्णु की नित्य-शक्ति और पत्नी, ऐश्वर्य, सौन्दर्य और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी; समुद्र-मन्थन से प्रकट होकर उन्होंने विष्णु का वरण किया। लोक-व्यवहार में उन्हें 'चञ्चला' कहा जाता है क्योंकि सम्पत्ति स्थिर नहीं रहती, किन्तु भागवत इस लोकोक्ति को उलट देता है: भा. १.११.३४ में कहा गया है कि चञ्चला होकर भी वे भगवान् के चरणों को कभी नहीं छोड़तीं, और भा. १.११.२७ में भगवान् का वक्ष ही उनका निवास बताया गया है।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.11.28 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=110182)
श्री (लक्ष्मी) कृष्ण के चरणों को कभी नहीं छोड़तीं: 'चलापि यच्छ्रीर्न जहाति कर्हिचित्' (भा. १.११.३४) — यद्यपि वे चञ्चला कही जाती हैं। तथा 'श्रियो निवासो यस्योरः' (भा. १.११.२७) — उनका वक्ष श्री का निवास है। प्रमाण: प्रत्यक्ष।