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महाभारत

Mahabharata

त्रयी से वंचितों के लिए रचा गया

'स्त्रीशूद्रद्विजबन्धूनां त्रयी न श्रुतिगोचरा' (भा. १.४.२५)।

आम्नायार्थ प्रकाशक; स्त्री-शूद्र हेतु धर्म-द्वार

'भारतव्यपदेशेन ह्याम्नायार्थश्च दर्शितः' (भा. १.४.२९)।