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सिद्धांत
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महत्तत्त्व

Mahat-tattva

पुरुष-रूप की रचना का प्रथम तत्त्व

पुरुष-रूप 'महदादिभिः' — महत् आदि तत्त्वों से निर्मित है (भा. १.३.१)।

अव्यक्त से प्रथम विकार; विज्ञानस्वरूप

काल से प्रेरित अव्यक्त से महत्तत्त्व उत्पन्न हुआ, जो विज्ञानस्वरूप होकर आत्मदेह-स्थ विश्व को व्यक्त करता है और तम को दूर करता है: 'ततोऽभवन्महत्तत्त्वमव्यक्तात्कालचोदितात्' (भा. ३.५.२७)। तदनन्तर भगवद्-दृष्टि-गोचर होकर यह अपने को व्यक्त करता है (भा. ३.५.२८) और उससे अहंतत्त्व निकलता है (भा. ३.५.२९)।