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मरुद्गण

Maruts

मरुत् वायु और तूफान के देवगण हैं, रुद्र के पुत्र और इन्द्र के सहचर, जो ऋग्वेद में चमकते आयुधों और स्वर्ण आभूषणों से युक्त एक साथ गरजते हुए आते हैं; उनकी संख्या उनचास कही जाती है और उनका जन्म दिति के गर्भ के इन्द्र द्वारा खण्डित किए जाने की कथा से जोड़ा जाता है। वे बल, ओज और वेग के अधिष्ठाता हैं। भा. २.३.८ में ओज की कामना वाले को मरुद्गणों के यजन का विधान है, जो उनके इसी स्वरूप के अनुरूप है।

श्रीमद्भागवतमहापुराण 2.3.8 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=201379)