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देवता
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मित्र

Mitra

मित्र — देवता, विराट्-पुरुष के गुद के लोकेश। भा. ३.६.२० में: 'गुदं पुंसो विनिर्भिन्नं मित्रो लोकेश आविशत् । पायुनांशेन येनासौ विसर्गं प्रतिपद्यते' — विराट् का गुद विदीर्ण होने पर मित्र ने प्रवेश किया, और उनकी अंश-पायु से विसर्ग की प्राप्ति होती है। वे विश्वामित्र से भिन्न सत्ता हैं, जिनके नाम में केवल यही शब्द आता है।

श्रीमद्भागवतमहापुराण 3.6.20 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर अध्याय-पृष्ठ; देवनागरी पाठ सत्यापित प्रतिलिपि से — validation/sanskrit_skandha3.json)