'त्रिःसप्तकृत्वः कुपितो निःक्षत्रामकरोन्महीम्' — ब्रह्मद्रुह राजाओं से कुपित (भा. १.३.२०)।
परशुराम
Parashurama
परशुराम — जमदग्नि-ऋेणुका के पुत्र, भृगु-वंशीय ब्राह्मण-योद्धा, विष्णु का षोडश अवतार: जो क्षत्रिय-अत्याचार के उन्मूलन हेतु इक्कीस बार पृथ्वी निःक्षत्र करते रहे; परम्परा में चिरजीवी और कलियुग-अन्त के विद्या-गुरु (कल्कि के शस्त्र-गुरु) माने गए। भा. १.३.२०: 'अवतारे षोडशमे... त्रिःसप्तकृत्वः कुपितो निःक्षत्रामकरोन्महीम्' (पाठ नाम नहीं देता; परशुराम-तादात्म्य सर्वसम्मत)।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.3.20 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=369178)
षोडश अवतार: 'अवतारे षोडशमे' (भा. १.३.२०) — क्षत्रिय-शोधक योद्धा-ब्राह्मण, परशुराम सर्वसम्मत। प्रमाण: तादात्म्य प्रबल साक्ष्य; कृत्य प्रत्यक्ष।
ब्रह्म-द्रोही राजाओं से कुपित होकर उन्होंने इक्कीस बार पृथ्वी को निःक्षत्र किया: 'त्रिःसप्तकृत्वः कुपितो निःक्षत्रामकरोन्महीम्' (भा. १.३.२०)। प्रमाण: प्रत्यक्ष।