'इत्थं व्रजन्भारतमेव वर्षं कालेन यावद्गतवान्प्रभासम्' (भा. ३.१.२०); 'तत्राथ शुश्राव सुहृद्विनष्टिम्' (भा. ३.१.२१)।
स्थान
प्रभास
Prabhasa
प्रभास — सौराष्ट्र-तट का तीर्थक्षेत्र। भा. ३.१.२०-२१ में यह विदुर के पर्यटन का एक पड़ाव है और वही स्थान है जहाँ उन्हें अपने स्वजनों (यदुवंश) के विनाश का समाचार मिला: 'कालेन यावद्गतवान्प्रभासम् ... तत्राथ शुश्राव सुहृद्विनष्टिम्'।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 3.1.20 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर अध्याय-पृष्ठ; देवनागरी पाठ सत्यापित प्रतिलिपि से — validation/sanskrit_skandha3.json)
विदुर के पर्यटन का स्थान; यदु-विनाश का समाचार यहीं मिला
यदुवंश के अन्तिम तीर्थ-गमन का स्थान
वृष्णि, भोज और अन्धक प्रभास गये, वहाँ स्नान कर पितरों, देवताओं और ऋषियों का तर्पण किया, और ब्राह्मणों को गौ, स्वर्ण, रजत, वस्त्र, हाथी, कन्याएँ और भूमि दान में दीं (भा. ३.३.२५-२८)।