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प्रभास

Prabhasa

यदुवंश के अन्तिम तीर्थ-गमन का स्थान

वृष्णि, भोज और अन्धक प्रभास गये, वहाँ स्नान कर पितरों, देवताओं और ऋषियों का तर्पण किया, और ब्राह्मणों को गौ, स्वर्ण, रजत, वस्त्र, हाथी, कन्याएँ और भूमि दान में दीं (भा. ३.३.२५-२८)।