हरि-कलाएँ — ऋषि-मनु सहित
'सप्रजापतयस्तथा' (भा. १.३.२७)।
Prajapatis
प्रजापति-गण — सृष्टि के प्रजननाधिकारी पितामह: ब्रह्मा के मानस-पुत्र (मरीचि, अत्रि, अङ्गिरा, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, वसिष्ठ आदि), जिनसे समस्त प्राणियों की वंश-परम्परा चली। भा. १.३.२७ में हरि की कलाएँ कहे गए; भा. १.२.२७ में रज-तम प्रकृति के लोग सन्तान-ऐश्वर्य हेतु इनकी आराधना करते हैं।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.3.27 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=369178)
'सप्रजापतयस्तथा' (भा. १.३.२७)।