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सिद्धांत
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प्रकृति

Prakriti

अन्य नाम प्रधानम् · Pradhana (the primal nature)

सत्त्व-रजस्-तमस् इनके गुण

'सत्त्वं रजस्तम इति प्रकृतेर्गुणाः' (भा. १.२.२३)।

रज-तम प्रकृति की उपासना-प्रवृत्ति

रज-तम प्रकृति के लोग धन-ऐश्वर्य-सन्तान की कामना से पितरों, भूतों, प्रजापत्यादि की आराधना करते हैं: 'रजस्तमःप्रकृतयः... भजन्ति' (भा. १.२.२७)।

भूत, इन्द्रिय और मन असङ्गत रहकर शरीर नहीं रच सके

'यदायतननिर्माणे न शेकुर्ब्रह्मवित्तम' (भा. २.५.३२); 'तदा संहत्य चान्योन्यं भगवच्छक्तिचोदिताः' (भा. २.५.३३) — रचना भगवत्-शक्ति से हुई, तत्त्वों से नहीं।

प्रधान के नाम से भी अभिहित

भा. ३.९.४४ में भगवान् को 'प्रधानपुरुषेश्वरः' — प्रधान और पुरुष के ईश्वर — कहा गया है। प्रधान प्रकृति का ही नाम है, इसलिये इसे पृथक् सत्ता के रूप में नहीं, प्रकृति के पर्याय के रूप में दर्ज किया गया है।