'ऋषिभिर्याचितो भेजे नवमं पार्थिवं वपुः' (भा. १.३.१४)।
पृथु
Prithu
अन्य नाम पार्थिवं वपुः · Parthiva-vapu (the earthly form)
पृथु — हिन्दू परम्परा के प्रथम सम्राट (चक्रवर्ती-आदर्श के आरम्भ माने जाते हैं): वेन के पुत्र, जिन्होंने पृथ्वी को कृषि-योग्य बनाया — इन्हीं के नाम से पृथ्वी 'पृथ्वी' कहलाई (ऐतिह्यिक परम्परा)। भा. १.३.१४: ऋषियों के आग्रह पर भगवान् ने पार्थिव वपु धारण किया — 'नवमं पार्थिवं वपुः' — और इन्हीं के द्वारा पृथ्वी की औषधियाँ दुही गईं (पृथु = नवम् अवतार, सर्वसम्मत पहचान)।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.3.14 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=369178)
'दुग्धा वसूनि वसुधा सकलानि येन' (भा. २.७.९)। यही कर्म भा. १.३.१३ में भी कथित है, जहाँ सम्बन्ध prithu→milked→earth पहले ही अभिलिखित है; यहाँ केवल नया प्रमाण जोड़ा गया है।
नवम: ऋषियों के आग्रह पर भगवान् ने पार्थिव वपु धारण किया — पृथु, सर्वसम्मत पाठ: 'ऋषिभिर्याचितो भेजे नवमं पार्थिवं वपुः' (भा. १.३.१४)। प्रमाण: तादात्म्य प्रबल साक्ष्य; धारणा प्रत्यक्ष।
पृथु के द्वारा पृथ्वी-रूप गाय से औषधि-रस दुहा गया: 'दुग्धेमामोषधीः' (भा. १.३.१४)। प्रमाण: प्रत्यक्ष।