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वेन

Vena

वेन अङ्ग राजा के पुत्र और मृत्यु की कन्या सुनीथा के दौहित्र हैं, जो भागवत के चतुर्थ स्कन्ध में दुष्ट राजा के दृष्टान्त रूप में आते हैं। राज्य पाकर उन्होंने यज्ञ और दान का निषेध कर स्वयं को ही पूज्य घोषित किया, जिस पर ऋषियों ने 'हुंकार' मात्र से उनका वध कर दिया। तदनन्तर उनकी भुजा के मन्थन से पृथु उत्पन्न हुए, जो प्रथम अभिषिक्त सम्राट् माने जाते हैं। भा. २.७.९ इस प्रसङ्ग को संक्षेप में कहता है और यह विशेष बात जोड़ता है कि नरक में गिरते हुए वेन को भगवान् ने प्रार्थना किए जाने पर बचाया — अर्थात् पुत्र का पद ग्रहण करना ही पिता का उद्धार बना।

श्रीमद्भागवतमहापुराण 2.7.9 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=200170)