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पुरुष अवतार

Purusha-avatara (the first cosmic Purusha)

अन्य नाम Adhipurusha · Hiranmaya-purusha · अधिपुरुष · हिरण्मयः पुरुषः · पौरुषं रूपम् · Paurusha-rupa (the purusha form)

सृष्टि-आरम्भ में षोडश-कला रूप

'जगृहे पौरुषं रूपं... संभूतं षोडशकलमादौ लोकसिसृक्षया' (भा. १.३.१)।

कारण-जल पर शयन

'यस्याम्भसि शयानस्य' (भा. १.३.२)।

लोक-विस्तर का आकार-प्रारूप; विशुद्ध सत्त्वमूर्जित

'यस्यावयवसंस्थानैः कल्पितो लोकविस्तरः... तद्वै भगवतो रूपं विशुद्धं सत्त्वमूर्जितम्' (भा. १.३.३)।

सहस्र-अंग विश्वरूप

असीम — सहस्र पाद, ऊरु, भुज, आनन, मूर्ध, कर्ण, अक्षि, नासिका, मुकुट, अम्बर और कुण्डल से विराजमान (भा. १.३.४)।

समस्त अवतारों का अव्यय बीज-भूत

'एतन्नानावताराणां निधानं बीजमव्ययम्' — देव-तिर्यक्-नरादि इन्हीं के अंशों से उत्पन्न (भा. १.३.५)।

माया-गुणों से महत् से रचित; स्वयं निराकार चिदात्मा का रूप

'एतद्रूपं भगवतो ह्यरूपस्य चिदात्मनः मायागुणैर्विरचितं महदादिभिः' (भा. १.३.३०)।

त्रिधा विभाजन — साध्यात्म, साधिदैव, साधिभूत

वह अपने द्वारा अपने को एकधा, दशधा और त्रिधा विभाजित करता है (भा. ३.६.७); तदनन्तर त्रिधा का विवरण मिलता है: 'साध्यात्मः साधिदैवश्च साधिभूत इति त्रिधा । विराट् प्राणो दशविध एकधा हृदयेन च' (भा. ३.६.९)।

पुरुष अवतार — composed of — महत्तत्त्व

पुरुष-रूप महत् आदि तत्त्वों से निर्मित है: 'संभूतं... महदादिभिः' (भा. १.३.१)। प्रमाण: प्रत्यक्ष।

पुरुष अवतार — avatara of — श्रीकृष्ण

प्रथम पुरुष-रूप भगवान् का स्वीकृत रूप है: 'जगृहे पौरुषं रूपं भगवान्' (भा. १.३.१); भा. १.३.२८ ('एते चांशकलाः पुंसः') इस अध्याय के सब अवतार-सम्बन्धों का आधार है। प्रमाण: प्रत्यक्ष।

पुरुष अवतार — rests in — योगनिद्रा

पुरुष कारण-जल पर शयन कर योगनिद्रा वितन्वता है: 'योगनिद्रां वितन्वतः' (भा. १.३.२)। प्रमाण: प्रत्यक्ष।

पुरुष अवतार — source of — ब्रह्मा

विश्वसृजां पतिः ब्रह्मा पुरुष की नाभि-कमल से उत्पन्न हुए: 'नाभिह्रदाम्बुजादासीद् ब्रह्मा' (भा. १.३.२) — दिशा सत्यापित (पुरुष → ब्रह्मा)। प्रमाण: प्रत्यक्ष।