राजा
रन्तिदेव
Rantideva
रन्तिदेव — सङ्कृति के पुत्र, चन्द्रवंशी राजा, औदार्य के परम आदर्श। अड़तालीस दिन के उपवास के अन्त में जब भोजन और जल सामने आया, तब क्रमशः ब्राह्मण, शूद्र, श्वपच और कुत्तों को देकर उन्होंने स्वयं कुछ न लिया — और अन्तिम जल भी प्यासे चाण्डाल को दे दिया, यह कहते हुए कि वे प्राणियों के दुःख का नाश चाहते हैं, अपने लिए मोक्ष भी नहीं। भा. १.१२.२४ में परीक्षित को 'रन्तिदेव के समान उदार' कहा गया है।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.12.24 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=110183)