इनके स्वामी स्वयं कृष्ण हैं
'भगवान् सात्वतां पतिः' (भा. १.१.१२)।
Satvatas
सात्वत — यादव-वृष्णि परम्परा के उस भक्त-कुल का नाम है जिसके स्वामी स्वयं कृष्ण कहलाए; भागवत-परम्परा में 'सात्वत' विष्णु-भक्त यादवों का वाचक हुआ और 'सात्वत-तन्त्र' जैसे शास्त्र-नाम इसी से बने। संसाधित पदों में: 'भगवान् सात्वतां पतिः' — कृष्ण इनके स्वामी हैं (भा. १.१.१२; पुनः १.२.१४)।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.1.12 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=110172)
'भगवान् सात्वतां पतिः' (भा. १.१.१२)।
सात्त्वत लोग संकेत-ज्ञ, अत्यन्त प्रौढ़ और एकार के उपासक थे; उन सबने सात्त्वतों के श्रेष्ठ को 'भूतावास' — समस्त भूतों का निवासस्थान — ही माना (भा. ३.२.९)।