उद्धव राजसूय का साक्ष्य देते हैं कि कृष्ण से द्वेष करने पर भी चैद्य को वह सिद्धि मिली जिसकी योगी सम्यक् योग से लालसा करते हैं: 'चैद्यस्य कृष्णं द्विषतोऽपि सिद्धिः' (भा. ३.२.१९)। 'चैद्य' चेदि-नरेश का पितृव्यंशीय नाम है।
राजा
शिशुपाल
Shishupala
शिशुपाल (चैद्य) — चेदि देश का राजा, दमघोष और श्रुतश्रवा का पुत्र; श्रुतश्रवा वसुदेव की बहन थीं, अतः वे कृष्ण के फुफेरे भाई हुए। रुक्मिणी के विवाह में वे वर के रूप में नियत थे, किन्तु कृष्ण ने उन्हें और उनके सहयोगियों को परास्त करके रुक्मिणी का हरण किया (भा. १.१०.२९)। युधिष्ठिर के राजसूय में कृष्ण को अग्र-पूजा मिलने पर उन्होंने घोर निन्दा की और सौ अपराध पूर्ण होने पर सुदर्शन चक्र से मारे गए। परम्परा में वे जय-विजय के तीन असुर-जन्मों में से एक माने जाते हैं, जिन्हें द्वेष-भक्ति से भी मोक्ष मिला।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.10.29 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=110181)
द्वेष करते हुए भी सिद्धि प्राप्त करना