Sanatan Info

बीटा AI
ऋषि
साझा करें
WhatsApp Facebook X / Twitter Instagram Gmail ईमेल Telegram

शृङ्गी

Shringi

शृङ्गी — शमीक ऋषि के अत्यन्त तेजस्वी बालक पुत्र। भा. १.१८.३२–३७ में साथियों के साथ खेलते हुए उन्होंने सुना कि राजा ने उनके पिता का अपमान किया है; क्रोध से लाल आँखों वाले उस बालक ने कौशिकी नदी के जल का स्पर्श कर 'वाग्वज्र' छोड़ा — कि सातवें दिन तक्षक परीक्षित को डँसेगा। यह शाप ही भागवत के कथन का निमित्त बना, क्योंकि उन्हीं सात दिनों में शुकदेव ने परीक्षित को सम्पूर्ण भागवत सुनाया। पिता ने इस कृत्य का अनुमोदन नहीं किया और इसे अपरिपक्व बुद्धि का पाप कहा (भा. १.१८.४१, ४७); इस प्रकार शास्त्र स्वयं इस शाप को अनुचित ठहराता है।

श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.18.32 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=110189)