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श्रीमद्भागवत

Srimad Bhagavata Purana

अन्य नाम ब्रह्मसम्मितम् · पुराणार्कः · सात्वती श्रुतिः · भागवतम् · Brahma-sammita (measured as Brahman) · Purana-arka (sun among the Puranas) · Satvati-shruti (the Veda of the Satvatas) · Srimad Bhagavatam

श्रीमद्भागवत पुराण — अष्टादश महापुराणों में श्रेष्ठ, वेदव्यास-विरचित, कृष्ण-भक्ति-केन्द्रित ग्रंथ; वैष्णव परम्परा इसे 'पाँचवा वेद' कहती है। संसाधित पदों में: यह छल-रहित परम धर्म है — निःस्पृह सज्जनों का धर्म; परम तत्त्व जानाता, तापत्रय-मूलोच्छेदक (भा. १.१.२); वेद-कल्पतरु का शुकमुख से प्राप्त पका फल (१.१.३); 'ब्रह्मसम्मित' उत्तमश्लोक-चरित, भगवान् ऋषि-रचित (१.३.४०); सर्ववेदेतिहासों के सार का भी सार (१.३.४२); कलि-पीड़ितों के लिए उदित पुराणार्क (१.३.४४)। इसकी नित्य सेवा से दृढ़ भक्ति होती है (१.२.१८) और सेवक के हृदय में भगवान् तत्क्षण प्रतिष्ठित होते हैं (१.१.२)।

श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.1.2 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=110172)