भा. ३.८.३१ में ब्रह्मा हरि का ध्यान करते हैं, जो 'सूर्येन्दुवाय्वग्न्यगमं त्रिधामभिः परिक्रमत्प्राधनिकैर्दुरासदम्' हैं — सूर्य, इन्द्र, वायु और अग्नि से अगम्य, त्रिधाम, परिक्रमण करते प्राधनिकों से दुर्आसद। भा. ३.८.१४ में सूर्य की तुलना पद्मकोश के स्वरोचिष से की गयी है।
सूर्य
Surya
सूर्य — देवता। भा. ३.८.३१ में ब्रह्मा हरि का ध्यान करते हैं, जो 'सूर्येन्दुवाय्वग्न्यगमं त्रिधामभिः परिक्रमत्प्राधनिकैर्दुरासदम्' हैं — सूर्य, इन्द्र, वायु और अग्नि से अगम्य, त्रिधाम, परिक्रमण करते प्राधनिकों से दुर्आसद। यहाँ सूर्य का उल्ले चन्द्र, वायु और अग्नि के साथ, भगवान् के धाम की अगम्यता का माप बताते हुए, किया गया है। भा. ३.८.१४ में सूर्य को उपमा के रूप में लिया गया है, जहाँ पद्मकोश अपने स्वरोचिष से विशाल जल को 'अर्क इव' — सूर्य के समान — प्रकाशित करता है। रोस्टर में इसके पूर्व कोई सूर्य-सत्ता नहीं थी।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 3.8.31 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर अध्याय-पृष्ठ; देवनागरी पाठ सत्यापित प्रतिलिपि से — validation/sanskrit_skandha3.json)