सुयज्ञ रुचि और आकूति के पुत्र रूप में अवतीर्ण हुए और तीनों लोकों की महती पीड़ा हरने के कारण स्वायम्भुव मनु ने उन्हें 'हरि' कहा: 'लोकत्रयस्य महतीमहरद्यदार्तिं स्वायम्भुवेन मनुना हरिरित्यनूक्तः' (भा. २.७.२)। प्रमाण: प्रत्यक्ष।
देवता
सुयज्ञ
Suyajna
सुयज्ञ स्वायम्भुव मन्वन्तर के अवतार हैं, जो प्रजापति रुचि और मनु-पुत्री आकूति के पुत्र रूप में प्रकट हुए; उन्होंने दक्षिणा से सुयम नामक देवगण उत्पन्न किए और तीनों लोकों की महती पीड़ा का हरण किया। भा. २.७.२ के अनुसार इसी कारण स्वायम्भुव मनु ने उन्हें 'हरि' नाम दिया — अर्थात् 'हरि' संज्ञा की व्युत्पत्ति ही आर्ति-हरण से जोड़ी गई है। भागवत के अष्टम स्कन्ध में उन्हें मन्वन्तरावतारों में गिना गया है। भा. १.३ की अवतार-सूची में यह अवतार नामतः नहीं आता, इसलिए इसे यहाँ पृथक् इकाई रूप में रखा गया है।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 2.7.2 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=200170)
सुयज्ञ — avatara of — श्रीकृष्ण