सिद्धांत
तेज
Tejas
तेज पञ्च महाभूतों में तृतीय है, जिसका गुण रूप है और जो पूर्व-अन्वय से स्पर्श तथा शब्द भी धारण करता है। यह अग्नि, प्रकाश, ताप और दृष्टि-सामर्थ्य का मूल तत्त्व है; छान्दोग्य उपनिषद् की त्रिवृत्करण-प्रक्रिया में तेज, अप् और अन्न की तीन देवताओं के रूप में गणना है। भा. २.५.२७ में इसकी उत्पत्ति वायु के विकार से काल, कर्म और स्वभाव के द्वारा बताई गई है — अर्थात् भूत-सृष्टि यान्त्रिक नहीं, अपितु इन तीन अधिष्ठानों से सञ्चालित है, जिन्हें भा. २.५.२१ में भगवान् ने स्वयं ग्रहण किया कहा गया है।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 2.5.27 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=200167)